मित्रों श्री राजीव दीक्षित के एक व्याक्यान में उन्होंने बताया था कि वे एक बार जर्मनी गए थे और वहां एक प्रोफेसर से उनका विवाद हो गया। विवाद का विषय था ”भारत महान या जर्मनी?” जब कोई निर्णय नहीं निकला तो उन्होंने एक रास्ता बनाया कि दोनों जन एक दूसरे से उसके देश के बारे में कुछ सवाल पूछेंगे और जिसके जवाब में सबसे ज्यादा हाँ का उत्तर होगा वही जीतेगा और उसी का देश महान। अब राजीव भाई ने प्रश्न पूछना शुरू किया। उनका पहला प्रश्न था-

बनको ज्यान गयो, तर गोरेको सुन भेटिएन । बनको मृत्यु दुर्घटनामा दर्ज भएकोले गोरेलाई आफ्नो सुन खोज्न समय र सुविधा भयो । उप्रेतीले आफ्ना पूर्वलेखा सहयोगी सनम शाक्यले सुन लगेको शंका गरे । आफूसँग काम गरेर तीन महिनाअघि अलग्गिएका शाक्यले षड्यन्त्रपुर्वक सुन गायब बनाएका हुन सक्छन् भनेर उनलाई नियन्त्रणमा लिइयो । सनमसँगै टेकराज मल्ल, कृष्ण भनिने नरेन्द्र कार्की र मोहन काफ्लेलाई नियन्त्रणमा लिएर काठमाडौंबाट मोरङ पुर्याइयो । गाडिमा उनीहरुलाई त्यति टाढा पुर्याइँदा पनि पनि प्रहरीबाट कुनै हस्तक्षेप भएन ।
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